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पांव पर पांव चढ़ाकर बैठना ख़तरनाक है?

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आप कुर्सी पर किस तरह से बैठते हैं? कई लोगों को आपने एक पांव पर दूसरा पांव चढ़ाकर बैठते हुए देखा होगा.

माना जाता है कि इस तरह से बैठना स्वास्थ्य के लिए अच्छा नहीं है.

ऐसा भी कहा गया है कि एक पांव पर दूसरा पांव पर चढ़ा कर लंबे समय तक बैठने से कई तरह की समस्याएं पैदा होती हैं.

इनमें ब्लड प्रेशर का बढ़ना और वेरिकोस वेन्स (नसों पर दबाव बढ़ना और उनका क्षतिग्रस्त होना) जैसी समस्याओं का ज़िक्र किया जाता है.

अमरीका में डाइट सप्लिमेंट बनाने वाली एक कंपनी ने तो 1999 में एक पब्लिसिटी कैम्पेन चलाई जिसमें लोगों को 24 घंटे तक एक पांव दूसरे पर न चढ़ाने के लिए प्रोस्तासिहत किया जाता था.

बहरहाल, इससे गिनाई जाने वाली स्वास्थ्य संबंधी समस्याओं की असलियत क्या है? क्या ये वाकेई स्वास्थ्य के लिए नुकसानदेह है.

वैसे एक पैर पर दूसरा पैर रखकर लंबे समय तक बैठने से पांव सुन्न हो जाता है. ये इसलिए होता है क्योंकि इस तरह बैठने से घुटने के पीछे वाली नस पर दबाव बढ़ जाता है और निचले हिस्से में रक्त प्रवाह रुक जाता है.

आम धारणा है कि अगर ऐसे बैठने की आदत हो जाए तो फ़ुट ड्रॉप जैसी गंभीर समस्या हो सकती है. इसमें आप अपने पांव के अगले हिस्से और अंगूठे को उठा नहीं पाते हैं.

इस बारे में जब दक्षिण कोरिया में एक अध्ययन किया गया तो पाया गया कि फ़ुट ड्रॉप की समस्या पांव पर पांव चढ़ाकर बैठने से नहीं होती है. क्योंकि इस तरह बैठने में दिक्कत महसूस होते ही हम आरामदेह स्थिति में बैठ जाते हैं.

लेकिन पांव पर पांव चढ़ाकर बैठने से ब्लड प्रेशर क्या वाकई बढ़ जाता है? 2010 तक हुए करीब सात चिकित्सीय अध्ययनों में ये पाया गया है कि इस अंदाज़ में बैठने से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. लेकिन एक अध्ययन ऐसा है भी है जो बताता है कि ऐसा नहीं होता.

हालांकि इन सब अध्ययनों में ब्लड प्रेशर का माप एक बार ही लिया गया है. इस्तांबुल के हाइपरटेंशन क्लिनिक में विस्तृत अध्ययन किया गया.

इस अध्ययन में विशेषज्ञों ने कई बार प्रयोग दोहराने के बाद पाया कि पांव पर पांव चढ़ाकर बैठने से ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है. ये स्थिति उस शख़्स के साथ ज़्यादा होती है जिसका ब्लड प्रेशर पहले से ही बढ़ा होता है.

ऐसा क्यों होता है, इसके दो स्पष्टीकरण दिए जाते हैं. पहला स्पष्टीकरण तो यही है कि पांव पर पांव चढ़ा कर बैठने से हृदय तक पहुंचने वाले रक्त की मात्रा बढ़ जाती है और इससे ब्लड प्रेशर बढ़ जाता है.

दूसरे स्पष्टीकरण के मुताबिक पांव की मांसपेशियों पर दबाव बढ़ने से धमनियों में रक्त प्रवाह बाधित होता है. ज्वाइंट को बिना हिलाए डुलाए अभ्यास करने पर दबाव बढ़ता है.

इन दोनों स्पष्टीकरण में कौन सा सच्चाई के ज़्यादा करीब है, ये जानने के लिए नीदरलैंड्स में मनोवैज्ञानिक प्रयोग हुए हैं.

इन प्रयोगों में देखा गया कि हृदय गति कम हो और पांव पर पांव चढ़ाकर बैठे हों तो धमनियों में रक्त प्रवाह बाधित नहीं होता है लेकिन हृदय तक पहुंचने वाले रक्त की मात्रा बढ़ती जाती है और इसके चलते ही ब्लड प्रेशर बढ़ता है.

ऐसे में पांव पर पांव चढ़ाकर बैठने से ब्लड प्रेशर बढ़ता है लेकिन इसका कोई दीर्घकालीन नुकसान नहीं होता है. मात्र तीन मिनट में ही ब्लड प्रेशर फिर सामान्य हो जाता है. सबसे ज़्यादा ब्लड प्रेशर उन लोगों में बढ़ा जिन्हें पहले से ही हाई ब्लड प्रेशर की शिकायत थी.

लेकिन लंबे समय (तीन घंटे से ज़्यादा) तक पांव पर पांव चढ़ाकर उन्हें बिलकुल नहीं बैठना चाहिए, जिनमें ब्लड क्लॉटिंग का ख़तरा हो.

अब बात करते हैं एक और धारणा की कि पांव पर पांव चढ़ाकर बैठने से नसों के छतिग्रस्त होने का ख़तरा कितना बढ़ता है?

ये भी कि कुछ लोगों के साथ ऐसा क्यों होता है जबकि कुछ लोगों के साथ ऐसा नहीं होता है. इसे लेकर रहस्य बना हुआ है. लेकिन यह देखा गया है कि रक्त वाहिकाओं के क्षतिग्रस्त होने की वजह पांव पर पांव चढ़ाकर बैठना भर नहीं है. यह काफी हद तक जेनेटिक कारणों पर भी निर्भर करता है.

तो पांव पर पांव चढ़ाकर बैठने से नस, धमनियों और ब्लड प्रेशर पर कोई दीर्घकालीन असर नहीं होता, तो क्या इससे शरीर के जोड़ों पर असर होता है?

एक अध्ययन के मुताबिक तीन घंटे से ज़्यादा समय तक इस तरह बैठने से लोगों में आगे झुक कर चलने की संभावना बढ़ जाती है. हालांकि इसके नतीजे भी अलग अलग लोगों के लिए अलग होते हैं, क्योंकि हर किसी की क्षमता अलग होती है.

हाल के एक अध्ययन मुताबिक अगर लोगों को पांव पर पांव चढ़ाकर खड़ा होने से शरीर के जोड़ों के दर्द जैसी समस्याओं में आराम मिलता है. वैसे दिलचस्प ये है कि दाएं घुटने पर बाएं पांव को रखने की तुलना में बाएं घुटने पर दाएं पांव को लगभग दोगुने लोग रखते हैं.

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झुककर चलने को लोग अच्छा नहीं मानते हैं, लेकिन रोटरडम यूनिवर्सिटी मेडिकल सेंटर में एक दिलचस्प अध्ययन हुआ है जिसके मुताबिक झुक कर चलने के कुछ फ़ायदे हुए हैं.

इस अध्ययन के दौरान युवाओं को अपने पांव पर बैठने के लिए कहा गया और उसके बाद फिर घुटने पर दूसरे घुटने को चढ़ाकर बैठे.

घुटने पर घुटने चढ़ाकर बैठने से हिप के पीछे की मांसपेशियों में 11 फीसदी वृद्धि होती है, लेकिन अगर घुटने पर घुटने रखकर बैठने के बाद खड़ा हुआ जाए तो हिप की मांसपेशियों में 21 फ़ीसदी वृद्धि होती है. इस शोध के लेखकों के मुताबिक पेल्विक ज्वांइट्स में स्थायित्व बढ़ता है. ऐसे में केनी एवरेट स्टाइल में बैठने से शरीर को ज़्यादा नुकसान होता है.

अंग्रेज़ी में मूल लेख यहाँ पढ़ें जो बीबीसी फ्यूचर पर उपलब्ध है.

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