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न्यायिक नियुक्ति आयोग असंवैधानिक: सुप्रीम कोर्ट

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सुप्रीम कोर्ट ने जजों की नियुक्ति के लिए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग को रद्द कर दिया है.

केंद्र सरकार ने सुप्रीम कोर्ट और हाई कोर्ट में जजों की नियुक्ति और तबादले के लिए राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग एक्ट बनाया था जिसे सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी गई थी.

फ़ैसले के बाद वकील प्रशांत भूषण ने बताया कि सुप्रीम कोर्ट ने कहा है कि राष्ट्रीय न्यायिक नियुक्ति आयोग न्यायपालिका के कामकाज में दखल देता है.

पुराने तरीके यानि कॉलिजियम सिस्टम से ही जजों की नियुक्ति होगी.

क्या था क़ानून

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क़ानून के तहत प्रावधान ये था कि जजों की नियुक्ति करने वाले इस आयोग की अध्यक्षता भारत के मुख्य न्यायाधीश को करनी थी.

इसके अलावा सुप्रीम कोर्ट के दो वरिष्ठ न्यायाधीश, क़ानून मंत्री और दो जानी-मानी हस्तियां भी इस आयोग का हिस्सा थीं.

दो हस्तियों का चयन तीन सदस्यीय समिति को करना था जिसमें प्रधानमंत्री, मुख्य न्यायाधीश और लोक सभा में नेता विपक्ष या सबसे बड़े विपक्षी दाल के नेता शामिल थे.

इसमें दिलचस्प बात ये थी कि इस कानून की एक धारा के तहत अगर आयोग के दो सदस्य किसी नियुक्ति पर सहमत नहीं हुए तो आयोग उस व्यक्ति की नियुक्ति की सिफ़ारिश नहीं करेगा.

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