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जल्लीकट्टू के दौरान भड़के सांड, 3 की मौत

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Image caption जल्लीकट्टू पर सुप्रीम कोर्ट ने 2014 में प्रतिबंध लगा दिया था.

तमिलनाडु में दो अलग-अलग घटनाओं में सांडों को काबू में करने वाले पारंपरिक खेल जल्लीकट्टू और मंजू विरट्टू के दौरान मंगलवार को तीन व्यक्तियों की मौत हो गई.

इन खेलों को आयोजन पोंगल त्योहार के हिस्से के तौर पर किया गया. सांडों को काबू करने का खेल जल्लीकट्टू कहलाता है, जबकि सांडों की दौड़ को मंजू विरट्टू कहा जाता है. कभी-कभी इन दोनों आयोजनों को जल्लीकट्टू ही कहा जाता है.

कुछ साल पहले इसे प्रतिबंधित करने के बाद ये खेल राजनीतिक रूप से संवेदनशील हो गया था. पिछले साल इस पर प्रतिबंध के ख़िलाफ़ राज्यभर में प्रदर्शन हुए थे और राज्य सरकार को खेल को फिर से शुरू करने के लिए अध्यादेश लाना पड़ा था.

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राज्य के आलंगाल्लुर समेत कई स्थानों पर जल्लीकट्टू का आयोजन हुआ.

शिवगंगई ज़िले के सिरावायल में सांडों की दौड़ मंजू विरट्टू देख रहे दो लोगों की मौत हो गई. इस दौड़ में 77 बैलों ने हिस्सा लिया था.

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Image caption जल्लीकट्टू पर सांड को क़ाबू करने की कोशिश की जाती है

स्पर्धा के दौरान सजे-धजे सांडों को हालाँकि निर्धारित रास्ते से ही दौड़ाया जाता है, लेकिन कभी-कभार ये सांड दर्शकों की भीड़ में घुस जाते हैं और उन्हें निशाना बनाते हैं. सिरावायल में भी सांड दर्शकों के बीच घुस गए और लगभग 60 लोगों घायल कर दिया.

इस घटना में गंभीर रूप से घायल रामानाथन (45) और कासी (45) की मौत हो गई.

सूत्रों के मुताबिक आयोजकों ने जल्लीकट्टू के लिए पुलिस से इजाज़त ली थी और पर्याप्त सुरक्षा इंतजाम भी किए गए थे. पुलिस घटना की जाँच कर रही है.

एक अन्य घटना में तिरुचिरापल्ली ज़िले के आवरंगाडू में जल्लीकट्टू के दौरान एक भड़के हुए बैल ने सोलई पांडियन (25) नाम के एक व्यक्ति को मार डाला और 70 से अधिक लोगों को घायल कर दिया.

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