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कुपोषण के खिलाफ़ लड़ाई कमज़ोर हुईः मेनका

मेनका गांधीImage copyright PIB

समाचार एजेंसी रॉयटर्स को दिए गए एक इंटरव्यू में महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी ने कहा है कि बच्चों में कुपोषण के ख़िलाफ़ लड़ाई कमज़ोर हुई है.

मेनका के अनुसार सामाजिक क्षेत्र के बजट में कटौती के सरकार के फ़ैसले से बुरा असर पड़ा है.

इसके कारण भारत के लाखों स्वास्थ्य कार्यकर्ताओं को वेतन देना मुश्किल हो गया है.

हालांकि बाद में महिला और बाल कल्याण मंत्रालय ने समाचार एजेंसी रॉएटर्स की इस रिपोर्ट का खंडन किया कि मेनका गांधी ने ऐसा कुछ कहा है.

मंत्रालय ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि रॉयटर्स को दिए गए इंटरव्यू में बजट में कटौती के असर पर केंद्रीय मंत्री मेनका गांधी के कुछ बयान और उनकी व्याख्या को बिल्कुल ग़लत तरीक़े से पेश किया गया है.

मंत्रालय ने अपने बयान में कहा कि समाचार एजेंसी रॉयटर्स ने आईसीडीएस प्रोग्राम के बजट के बारे में मेनका गांधी से बातचीत की थी. उसमें मेनका गांधी ने वित्य आयोग की सिफ़ारिशों को स्वीकार किए जाने की बात की थी. लेकिन राज्य सरकारों ने अपने हिस्से के आर्थिक सहयोग पर पैर खींच लिए हैं जिसके कारण अनिश्चित्ता का माहौल बन गया है.

बयान के अनुसार केंद्रीय मंत्री को पूरी आशा है कि जल्द ही इसका कोई समाधान निकल जाएगा.

मंत्रिमंडल के किसी सदस्य का अपनी ही सरकार की नीतियों की सार्वजनिक तौर पर आलोचना मामूली बात नहीं है.

इस साल फ़रवरी में मोदी सरकार ने आर्थिक हालत में सुधार लाने के लिए ढांचागत निवेश को बढ़ा कर समाज कल्याण निवेश में कटौती की थी.

राज्यों से कहा गया था कि वे नई दिल्ली से मिलने वाले संघीय करों से बाक़ी कमी को पूरा करें.

Image copyright AFP
Image caption बच्चों में कुपोषण भारते में एक गंभीर समस्या है

लेकिन समाज कल्याण क्षेत्र में कटौती से भारत में कुपोषण कम करने के प्रयासों को कमज़ोर करने के लिए भारत की आलोचना हुई है.

क्योंकि भारत उन देशों में से एक है जहां बच्चों में कुपोषण की दर दुनिया में सबसे ज़्यादा है.

दुनिया के दस में से चार कुपोषित बच्चे भारतीय हैं और हर साल क़रीब 15 लाख बच्चों की पांच साल की उम्र से पहले मौत हो जाती है.

महिला एवं बाल कल्याण मंत्री मेनका गांधी दस करोड़ ग़रीब बच्चों के भोजन का इंतज़ाम करने वाली एक योजना की निगरानी करती हैं.

उन्होंने समाचार एजेंसी रॉएटर्स को बताया कि मौजूदा बजट के तहत 27 लाख स्वास्थ्य कर्मचारियों का वेतन सिर्फ़ जनवरी 2016 तक ही दिया जा सकता है.

ये एक गंभीर स्थिति है और इस पर तुरंत ध्यान देने की ज़रूरत है.

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