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अमरीकी ‘जासूस’ को मिली 10 साल की क़ैद

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Image caption न्यायिक सेवा के अधिकारी ग़ुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई

अधिकारियों के मुताबिक ईरान में एक अमरीकी नागरिक को जासूसी के आरोप में 10 साल की क़ैद की सज़ा सुनाई गई है.

क़ानूनी सूत्रों के मुताबिक कथित जासूस की पहचान चीनी-अमरीकी नागरिक शियू वांग के रूप में की गई है.

शियू 37 साल के हैं और अमरीका की प्रिंसटन यूनिवर्सिटी में शोध कर रहे थे.

न्यायिक सेवा की न्यूज़ एजेंसी के मुताबिक वांग को पिछले साल अगस्त में गिरफ़्तार किया गया था जब वो देश छोड़कर जाने की कोशिश कर रहे थे.

अमरीकी विदेश मंत्रायल ने ईरान से मांग की है कि जिन लोगों को झूठे आरोपों में पकड़ा गया है, उन्हें रिहा किया जाए.

अमरीकी नागरिक को दी गई सज़ा का एलान सरकारी टीवी पर किया गया.

ईरानी न्यायिक सेवा की सरकारी न्यूज़ एजेंसी मिज़नऑनलाइन के मुताबिक, वांग एक घुसपैठ प्रोजेक्ट का हिस्सा थे जो अमरीका और ब्रितानी संस्थानों के लिए ख़ुफ़िया जानकारी जुटाने की कोशिश कर रहा था.

ये जानकारी अमरीकी विदेश मंत्रालय, प्रिंसटन यूनिवर्सिटी, हार्वर्ड कैनेडी स्कूल और ब्रिटिश इंस्टीट्यूट ऑफ़ पर्शियन स्टडीज़ के लिए भी जुटाई जा रही थी.

एजेंसी के मुताबिक, “गिरफ़्तार होने से पहले वांग ने क़रीब साढ़े चार हज़ार पन्ने के दस्तावेज़ डिजिटली आर्काइव भी कर लिए थे.”

तेहरान में अधिकारियों के मुताबिक क़रीब 70 लोग जासूसी के आरोप में जेलों में सज़ा काट रहे हैं.

उनमें से कुछ ही लोगों की पहचान सार्वजनिक की गई है.

अपील

न्यायिक सेवा के अधिकारी ग़ुलाम हुसैन मोहसेनी एजेई ने कहा, “वांग जानकारियां जुटा रहे थे और सीधे अमरीका से निर्देश ले रहे थे. उन्हें 10 साल के कारावास की सज़ा सुनाई गई है, हालांकि सज़ा के ख़िलाफ़ अपील की जा सकती है.”

उन्होंने कहा कि ये फ़ैसला ईरान की एक अदालत का है. उन्होंने इसके बारे में और कोई जानकारी नहीं दी.

एक बयान में अमरीकी विदेश मंत्रालय ने किसी ख़ास व्यक्ति का नाम नहीं लिया, लेकिन ईरानी अधिकारियों से अपील किया है कि ग़लत वजहों से पकड़े गए सभी विदेशी नागरिकों को रिहा किया जाना चाहिए ताकि वो अपने परिवारों में लौट सकें.

एक अमरीकी अधिकारी ने कहा, “ईरान की सरकार झूठे आरोपों में फंसाकर अभी भी अमरीकी और अन्य देशों के नागरिकों को पकड़ रही है.”

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